रेलवे में महिला सुरक्षा पर सवाल! शिकायतें गंभीर, कार्रवाई का हिसाब कहां?

बिलासपुर से रायपुर तक यौन उत्पीड़न, अभद्र व्यवहार और मानसिक प्रताड़ना के आरोप; पुरुष वर्चस्ववादी कार्यसंस्कृति पर उठे सवाल

अनिल शुक्ला की रिपोर्ट

बिलासपुर। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के बिलासपुर और रायपुर रेल मंडलों में महिला कर्मचारियों से जुड़े उत्पीड़न और दुर्व्यवहार के आरोपों ने कार्यस्थल पर सुरक्षा, सम्मान और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर सवाल खड़े किए हैं। अलग-अलग मामलों में यौन उत्पीड़न, अनुचित दबाव, अशोभनीय संदेश और मानसिक प्रताड़ना की शिकायतें सामने आई हैं।

बिलासपुर में प्लेसमेंट एजेंसी के माध्यम से कार्यरत महिला कर्मचारी ने कंस्ट्रक्शन विभाग के अधिकारी रुक्ष्मैया मीणा पर कथित यौन दबाव बनाने और नौकरी से हटाने की धमकी देने का आरोप लगाया। वहीं, नवंबर 2025 में चांपा में पदस्थ महिला कमर्शियल क्लर्क ने डिप्टी चीफ कमर्शियल मैनेजर कौशिक मित्रा पर अशोभनीय संदेश भेजने और अनुचित व्यवहार के आरोप लगाए थे। दोनों मामलों में अंतिम जांच रिपोर्ट और कार्रवाई की स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

रायपुर रेल मंडल में जनवरी 2026 में महिला कर्मचारी कल्पना कृष्णा स्वामी पुल्लेवार ने वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक अवधेश त्रिवेदी पर कथित अभद्र व्यवहार और मानसिक प्रताड़ना की शिकायत की थी। इसके अलावा, बिलासपुर में रेलवे अधिकारी फिरतूराम पटेल के खिलाफ एक नर्स की दुष्कर्म संबंधी शिकायत पर मामला दर्ज कर गिरफ्तारी किए जाने की खबर प्रकाशित हुई थी। इस प्रकरण की अंतिम न्यायिक स्थिति स्पष्ट नहीं है।

शिकायतों पर कार्रवाई का हिसाब कहां?

इन मामलों ने सवाल उठाया है कि क्या रेलवे की कार्यसंस्कृति में अब भी पुरुष वर्चस्ववादी सोच महिला कर्मचारियों के सम्मान और अधिकारों पर भारी पड़ रही है? हालांकि, शिकायतों के आधार पर पूरे रेलवे प्रशासन या किसी व्यक्ति को दोषी नहीं ठहराया जा सकता, लेकिन निष्पक्ष जांच और समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है।

रेलवे प्रशासन को स्पष्ट करना चाहिए कि पिछले पांच वर्षों में बिलासपुर और रायपुर मंडलों में महिला उत्पीड़न की कितनी शिकायतें मिलीं, कितने मामलों की जांच पूरी हुई, कितने लंबित हैं और आरोप प्रमाणित होने पर क्या कार्रवाई की गई।

महिला सुरक्षा का आकलन केवल शिकायत समितियों की मौजूदगी से नहीं, बल्कि निष्पक्ष जांच, शिकायतकर्ताओं की सुरक्षा और दोष सिद्ध होने पर कार्रवाई से होना चाहिए। रेलवे प्रशासन को इन मामलों की स्थिति और शिकायतों के समेकित आंकड़े सार्वजनिक करने चाहिए, ताकि महिला कर्मचारियों के लिए सुरक्षित और सम्मानजनक कार्यस्थल सुनिश्चित हो सके।

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